पहल… गढ़ भोज दिवस का आयोजन, ये रहा खास

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टिहरी। शहीद बेलमती चौहान राजकीय महाविद्यालय पोखरी क्वीली, टिहरी गढ़वाल में आज महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शशिबाला वर्मा के निर्देशन में महाविद्यालय की सांस्कृतिक समिति एवं एनएसएस इकाई के संयुक्त तत्वावधान में गढ़ भोज दिवस 2023 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र छात्राओं ने विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत में छात्र-छात्राओं द्वारा गढ़वाल के पारंपरिक अनाज एवं उसका महत्व विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया गया। साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा गढ़वाल के स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजन जैसे झंगोरा, झंगोर की खीर, कोदे की रोटी, लांगड़ी,बारहमासी छीमि, उड़द दाल पकौड़ी, सुंटा की पकौड़ी, पीसा लोन, भंगजीर, भांग, मारसा, जौ, तिल, लाल चावल, राजमा, चकोतरा की चटनी, नारियल और तिल की चटनी आदि गढ़वाली व्यंजन तैयार किये गए।

छात्र-छात्राओं में इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। उनके द्वारा गढ़वाल के प्रमुख जड़ी बूटी उत्पादों की एक प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। जिसमें प्रमुख रूप से कंडाली, कड़ी पत्ता, दालचीनी, टेमरू,पहाड़ी लौकी, गोदड़ी, ककड़ी, भिंडी, बेंगन चिचिंडा, बर्मी कद्दू आदि सम्मिलित थे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कर्मचारियों द्वारा भी गढ़वाली व्यंजनों की एक प्रदर्शनी स्वयं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों से लगाई गई। जिनमें कार्यालय की लिपिक रेखा नेगी एवं कुमारी अमिता पुनडोरा को पुरस्कार प्रदान किया गया।

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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर शशीबाला वर्मा ने उक्त कार्यक्रम की सराहना करते हुए समस्त छात्र-छात्राओं को गढ़वाल के पारंपरिक व्यंजनों को अपने दैनिक जीवन में सम्मिलित करने हेतु कहा गया। यह भी कहा गया कि वर्तमान में चल रहे ऐसे खाद्य पदार्थ जिनका सेवन शरीर के लिए नुकसानदेह है उनसे बचना चाहिए तथा हमें पहाड़ के उत्पादों को अधिक से अधिक अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। जिससे हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर सकें। कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉक्टर रामपुर के द्वारा गढ़वाल के उत्पादन में निरंतर कमी का कारण पलायन को बताते हुए इसको रोकने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया तथा छात्र-छात्राओं को इस विषय पर जागरूक किया गया कि हमें अपने पहाड़ को छोड़कर मैदाने की तरफ जाने गिर जाए अपने पहाड़ों में रहकर अपने पारंपरिक उत्पादन का उत्पादन करने पर ध्यान देना चाहिए इससे पहाड़ की आरती की सुधार हो एवं पहाड़ का स्वास्थ्य भी पूर्व की तरह उत्तम बना रहे।

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एनएसएस इकाई की प्रभारी सरिता सैनी द्वारा स्वयंसेवियों को पहाड़ी खाद्य पदार्थ की महत्ता एवं आवश्यकता के विषय पर विस्तार से जानकारी दी। सांस्कृतिक समिति की संयोजक डॉक्टर वंदना सेमवाल ने छात्र-छात्राओं को पहाड़ी उत्पादों एवं जड़ी बूटियां के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए बताया गया कि हमारे गढ़वाल में ऐसे खाद्य एवं औषधीय गुणों से परिपूर्ण जड़ी बूटियां उपलब्ध है, जिनका प्रयोग हम विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति पाने के लिए तथा अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए कर सकते हैं, जिनकी हम सभी को जानकारी होनी चाहिए।

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कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के सांस्कृतिक समिति के सदस्य विवेकानंद भट्ट ने किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. सुमिता पंवार, डॉ मुकेश प्रसाद सेमवाल, श्रीमती रचना राणा, रेखा नेगी, अंकित सैनी, कुमारी अमिता, दीवान सिंह, नरेंद्र बिजलवान, नरेश रावत, सुनीता, मूर्तिलाल आदि उपस्थित रहे।

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