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अल्मोड़ा….गजब हो गया….. इस बार रावण का पुतला ही नहीं जल पाया, दशहरा समिति पर लगे ये आरोप, देखें वीडियो

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अल्मोड़ा। इस सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में गजब हो गया। जिस रावण परिवार के पुतलों को देखने के लिए देश विदेश के लोग यहां पर आते हैं। उस परिवार के मुखिया रावण का पुतला ही नहीं जल पाया। शाम से दो पुतला समितियो के बीच से शुरू हुआ विवाद देर रात तक नहीं सुलझ पाया।

इस वजह से रावण का पुतला बनाने वाली समिति ने दशहरा महोत्सव समिति पर कई आरोप लगाते हुए रावण का पुतला नहीं जलाया। जिस जगह पर पुतला बनाया। उस जगह पर ही पुतला वापस रख दिया। रावण का पुतला नहीं जलाए जाने के बाद अब कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सांस्कृतिक नगरी की छवि को लेकर भी लोग बात कर रहे हैं।

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अल्मोड़ा का दशहरा महोत्सव पूरे देश में फेमस है। यहां पर रावण परिवार के 25 से अधिक पुतले बनाये जाते हैं। ये पुतले अलग अलग मोहल्लों में पुतला समितियो की ओर से तैयार किये जाते हैं। इसके बाद सारे पुतले नगर के शिखर तिराहे के पास एकत्र होते हैं। यहां से पुतले नगर की मुख्य बाजार होते हुए। स्टेडियम जाते हैं। यहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होने के साथ रावण परिवार के पुतलों को जलाया जाता है।

बीते दिवस दो पुतला समितियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। दरअसल विवाद शाम को उस वक्त हुआ जब एक पुतला समिति के एक युवक ने रावण पुतला समिति के नंदादेवी निवासी धनंजय से अभद्रता कर दी। धनंजय ने बताया कि एक युवक ने पहले उनका हाथ पकड़ा। फिर वह कमीज फाड़ने लगा। उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी उन्होंने दशहरा महोत्सव समिति को दी।

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दशहरा महोत्सव समिति से अभद्रता करने वाला युवक जिस पुतला समिति से है। उस पुतले को बाहर करने की मांग की। उनका आरोप है कि दशहरा महोत्सव समिति ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद चौक बाजार में विरोध में रावण के पुतले को रोका गया। इस वजह से राम का रथ भी चौक बाजार में रूक गया। किसी तरह यहां पर बातचीत के बाद रावण के पुतले को बाजार में ले जाया गया।

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इसके बाद फिर दशहरा समिति और रावण का पुतला बनाने वाली (नंदादेवी) समिति के बीच विवाद हो गया। यह विवाद इतना बढ़ गया कि रावण का पुतला बनाने वाली समिति ने स्टेडियम में रावण का पुतला जलाने से इंकार कर दिया। इसके बाद रावण का पुतला बनाने वाली समिति पुतला माल रोड होते हुए वापस लाने लगी और दशहरा समिति के खिलाफ नारेबाजी करने लगी। समिति ने जिस स्थान पर पुतला बनाया। उस स्थान पर ही पुतले को वापस रख दिया। मामले को लेकर नगर में काफी चर्चा है।

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