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वृद्ध जागेश्वर……आस्था और पर्यटकों की पसंदीदा जगह

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अल्मोड़ा जिले में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। जागेश्वर मंदिर की अपनी एक अलग पहचान है। लेकिन वृद्ध जागेश्वर मंदिर का अपना अलग महत्व है। यहां पर हर साल देश विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं। इसकी एक वजह आस्था है तो दूसरी वहज है सुकून। यहां भगवान शिव की विष्णु रूप में पूजा होती है। भगवान शिव को दिन में एक बार मालपुए का भोग लगाया जाता है। आमतौर पर शिव मंदिरों में दाल-भात का ही भोग चढ़ता है लेकिन वृद्ध जागेश्वर में विष्णु रूप में पूजे गये शिव को मालपुए का भोग दिन में एक बार अर्पित किया जाता है। विष्णु भगवान के रूप में शिव को पूजे जाने से यहाँ बलि नहीं होती। नारियल भी नहीं तोड़ा जाता। रीठागाड़ खांकरी गाँव के भट्ट ब्राह्मण वृद्ध जागेश्वर मंदिर में परंपरागत रूप से पूजा अर्चना संपन्न कराते रहे हैं। इस मंदिर में कई अनुष्ठान एवं विवाह संपन्न होते हैं। मंदिर के अहाते में हनुमानजी, कालिका माता, भैरव व कुबेर स्थापित हैं। मान्यता है कि विशेष पर्व में संतान प्राप्ति के लिए मंदिर के प्रांगण में महिलाएं रात्रि भर हाथ में जलता दीप लिए खड़ी रह प्रार्थना करतीं हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर मंदिर में चांदी के छत्र व ताम्र पात्र चढ़ाए जाते हैं।

वृद्ध जागेश्वर का मंदिर पहाड़ी में ऊँचाई पर स्थित है। हिमालय का बेहद विहंगम दृश्य भी यहां से दिखाई देता है।आस पास घने जंगल है। इसमें बुरांश और बाज के पेड़ हैं। जागेश्वर में आने वाले पर्यटक अब वृद्ध जागेश्वर भी जरूर आते हैं।

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ऐसे पहुँचे मंदिर

अल्मोड़ा पिथौरागढ़ मोटर मार्ग में जागेश्वर से पहले आरतोला से वृद्ध जागेश्वर को एक सड़क जाती है। करीब 10 किमी की इस सड़क के दोनों ओर बांज और बुरांस के पेड़ हैं। कई प्राकृतिक बनस्पति और पशु पक्षियों की आवाज भी आपको यहां मंत्रमुग्ध कर देगी। हर और जंगल होने से यहां पर बेहद सुकून भी मिलता है।

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हर साल आते हैं पर्यटक

वृद्ध जागेश्वर, शौकीयाथल और जौलाबाज क्षेत्र में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। यह क्षेत्र आस्था के साथ ही पर्यटक केंद्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। स्थानीय निवासी भीम सिंह और अमित सिंह ने बताया कि यहां पर बेहद शांत और प्रकृति के बीच पर्यटक रहना चाहते हैं। इसलिए यहां पर स्थानीय लोगों ने होम स्टे भी बनाये हैं। इससे उनको रोजगार मिलता है। होम स्टे में कमरा 500 से 3 हजार तक कमरे मिल जाते हैं। जो पर्यटक ट्रेकिंग करना चाहते हैं। वह भी यहां पर आते हैं।

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