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भैजी क दगड़ कुछ दिन पैली बात ह्वे छैई……परिजनों ने कही ये बात……. ये सपने नहीं हो पाए पूरे………

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देहरादून। सीडीएस बिपिन रावत के निधन से उत्तराखंड में भी शोक की लहर है। रावत ने सेना में जाकर देश की सेवा करने में इच्छुक उत्तराखंड के युवाओं के लिए बेहद बड़ा काम किया।
सेना भर्ती के कठिन मानकों में शिथलता देते भर्ती के ऊंचाई मानकों में छूट देने की हामी भरी थी। इसके बाद ऊंचाई मानकों में पांच सेंटीमीटर की छूट मिली थी। लेकिन रावत के कुछ सपने पूरे नहीं हो पाए। खासकर पौड़ी गढ़वाल स्थित अपने पुरखों की भूमि सैंणा गांव को सड़क से जोड़ने और गांव में मकान बनाने का सपना पूरा नहीं कर पाए। रावत ने अपने भाई से जनवरी में गांव आने का वायदा किया था जो पूरा नहीं हो पाया। सीडीएस बिपिन रावत का पैतृक गांव सैंणा, पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल ब्लॉक में है। यह कोटद्वार- कांडाखाल मार्ग पर बिरमौली ग्राम पंचायत का हिस्सा है। रावत के चाचा भरत सिंह कोटद्वार जाने के लिए लोकल मैक्सी कैब में बैठे हुए थे। जबकि भरत सिंह के बेटे देवेंद्र रावत कोटद्वार में अपने पिता का इंतजार कर रहे थे। देवेंद्र ने मीडिया को बताया कि ‘भैजी क दगड़ कुछ दिन पैली बात ह्वे छैई, उ जनवरी म घर आण वाल छयाई (भाई साहब के साथ कुछ दिन पहले ही बात हुई थी, वो जनवरी में घर आने वाले थे)। देवेंद्र ने बताया कि उनके गांव बिरमौली खाल से सैंणा गांव तक प्रस्तावित सड़क लंबे समय से अधर में लटकी हुई है। सीडीएस रावत अप्रैल 2018 में अपनी पत्नी मधुलिका के साथ गांव आए थे। वर्तमान में गांव में देंवेंद्र के पिता भरत सिंह ओर मां सुशीला देवी ही रहती हैं। एमए बीएड कर चुके देवेंद्र परीक्षा संबंधित तैयारी के लिए कोटद्वार में रहते हैं। रावत का ननिहाल उत्तरकाशी जिले के डुंडा ब्लॉक के थाती गांव में है। उनके एक मामा 1960 में उत्तरकाशी के विधायक भी रह चुके हैं।

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