उत्तराखंड के डॉक्टर नहीं चाहते पहाड़ में नौकरी, नागालैंड के डॉक्टर करेंगे इलाज

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का सपना अब भी अधूरा है। इसकी सबसे बड़ी वजह विशेषज्ञ चिकित्सकों और फैकल्टी की भारी कमी है। राज्य के कई डॉक्टर दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं देने से परहेज कर रहे हैं, जिससे पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से फैकल्टी के अधिकांश पद खाली पड़े हैं।

ऐसे में अब नागालैंड के दो चिकित्सकों ने यहां सेवाएं देने की सहमति जताई है। बीते 20 जुलाई को बीडी पांडे जिला अस्पताल में पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए फैकल्टी भर्ती का वॉक-इन-इंटरव्यू आयोजित किया गया। उम्मीद थी कि बड़ी संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक पहुंचेंगे, लेकिन केवल तीन चिकित्सकों का ही चयन हो सका।

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इनमें दो डॉक्टर नागालैंड के निवासी हैं। चयनित तीनों वर्तमान में अन्य राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत हैं और नियुक्ति मिलने के बाद अपने-अपने संस्थानों को नोटिस दे चुके हैं। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे जल्द ही पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में कार्यभार ग्रहण करेंगे।

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प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ डॉ. एके सिंह ने बताया कि पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के लिए हाल ही में हुए साक्षात्कार में तीन प्रोफेसरों का चयन हुआ है। इनमें दो चिकित्सक नागालैंड के निवासी हैं। सभी जल्द ही कार्यभार ग्रहण करेंगे।

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