उत्तराखंड:हरीश रावत ने कहा अब जिंदा रहने की जंग लड़ रहा हूं

Justice Shri T.S. Doabia presenting the report of the Committee set up to study and suggest changes required in the existing River Board Act, 1956 for Optimal Development of a River Basin to the Union Minister for Water Resources, Shri Harish Rawat, in New Delhi on November 06, 2012.
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत इन दिनों अस्वस्थता के चलते दिल्ली में अपने आवास पर रहकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। बुधवार को सोशल मीडिया पर एक मार्मिक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने अपनी बीमारी और राजनीति में प्रवेश के शुरुआती दिनों को याद किया। उनके इन शब्दों में जहां एक ओर मां का वात्सल्य छलका, वहीं सक्रिय राजनीति से दूर रहने की टीस और कसक भी साफ नजर आई।
अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने बताया कि कैसे ब्लॉक प्रमुख के चुनाव से उनकी राजनीतिक यात्रा की अप्रत्याशित शुरुआत हुई थी। दोस्तों और चाचा के कहने पर अनजाने में भरा गया पर्चा उनकी जिंदगी का मोड़ बन गया। उस वक्त आर्थिक तंगी के बीच जब पैसों की बात उठी, तो उनकी मां ने अपनी धोती की गांठ से 27 रुपये निकालकर दिए थे और कहा था- पैसों की बात आए तो पीछे मत हटना, जमीन बेच देंगे, पर लड़ना… डटकर लड़ना।
मां की उस सीख को याद करते हुए रावत ने लिखा कि उस दौरान मात्र दो रुपये खर्च हुए थे और वे चुनाव जीत गए। उसके बाद से उन्होंने जीवन में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार संघर्ष करते रहे।
जुझारू नेता के रूप में जाने जाने वाले हरीश के शब्दों में आज अपनी बीमारी को लेकर गहरी टीस दिखाई दी। उन्होंने भावुक होते हुए लिखा, ‘आगे भी खूब लड़ा, अब भी लड़ ही रहा हूं… हां, अब मैं जिंदा रहने की जंग लड़ रहा हूं।’ अस्वस्थता के कारण जनसेवा और जनसमस्याओं के लिए सड़कों पर न उतर पाने का दर्द उनके इस संदेश में स्पष्ट दिखाई देता है। हालांकि, वे इस कठिन दौर में भी अपनी मां के उन्हीं शब्दों से ऊर्जा पा रहे हैं, जो आज भी उनके कानों में गूंज रहे हैं ‘लड़ना, डटकर लड़ना।
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